प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना: मत्स्य के विकास की ओर एक कदम

pm matsya sampada yojna
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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश के नाविकों और मत्स्य उद्योग को संबलित करना है। इस योजना के माध्यम से मत्स्य उत्पादन, प्रबंधन, तकनीकी सहायता, पश्चात्‌य बगीचों, मात्स्यिकी संबंधित वित्तीय सेवाएं और बीमा आदि क्षेत्रों में सरकारी सहायता प्रदान की जाती है। यह योजना न केवल मत्स्य उद्योग के विकास को बढ़ावा देती है, बल्कि मत्स्यगंधा नाविकों को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का प्रयास करती है।

इस योजना के अंतर्गत, मत्स्य संगठनों और सागरीय संपदा विकास निगमों के लिए प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता, विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, नौकरियों की सृजन करने के लिए ऋणों और सब्सिडी, और सामुदायिक मत्स्यगंधा के लिए छोटे मत्स्य उद्योगों के विकास का समर्थन शामिल होता है।

Table of Contents

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना क्या है ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक पहल है जो मत्स्य संबंधित क्षेत्र में विकास को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की जाती है। यह योजना मत्स्य उद्योग को प्रोत्साहित करने, मत्स्यगंधा नाविकों को आर्थिक सहायता प्रदान करने और समुद्री संपदा के प्रबंधन में सुधार करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए विभिन्न उपायों को शामिल करती है।

इस योजना के अंतर्गत, मत्स्यगंधा नाविकों को आर्थिक सहायता, प्रशिक्षण, बीमा, और उनकी क्षमता और आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं प्रदान की जाती हैं। साथ ही, मत्स्यगंधा नाविकों को मत्स्य उद्योग में रोजगार के अवसर, नवाचारी तकनीकों का प्रशिक्षण, औद्योगिक पारिस्थितिकी का समर्थन, और सामुदायिक मत्स्यगंधा के विकास के लिए विशेष सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत कब हुई थी ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत 10 अक्टूबर 2017 को हुई थी। यह योजना “प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना” के रूप में प्रथम लॉन्च की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय मत्स्य उद्योग के विकास को बढ़ावा देना और मत्स्यगंधा नाविकों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत क्यों की गयी थी ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत कई कारणों से हुई है। यहां कुछ मुख्य कारण दिए जाते हैं:

  1. मत्स्य संबंधित क्षेत्र का विकास: मत्स्य उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण है और लाखों लोगों को रोजगार प्रदान करता है। यह क्षेत्र अपनी संपदा और विशेषताओं के कारण प्रमुख बाजारों में भी महत्वपूर्ण है। इसलिए, योजना के माध्यम से मत्स्य संबंधित क्षेत्र का विकास और उन्नति करने का उद्देश्य है।
  2. मत्स्यगंधा नाविकों की सहायता: मत्स्यगंधा नाविकों और कठिनाईयों के साथ काम करने वाले लोगों की सहायता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। योजना के तहत, उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है और उनके जीवन को सुधारने के लिए उपयुक्त सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
  3. समुद्री संपदा के प्रबंधन में सुधार: समुद्री संपदा की संरक्षा, प्रबंधन और उपयोग का विकास योजना का महत्वपूर्ण उद्देश्य है।
  1. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से समुद्री संपदा के प्रबंधन में निम्नलिखित तरीकों से सुधार होगा:
  2. संरक्षण के उपाय: योजना के तहत, समुद्री संपदा के संरक्षण के लिए विभिन्न उपायों की प्रदान की जाएगी। इसमें समुद्री जीवन के संरक्षण, संरक्षित क्षेत्रों का निर्माण, संरक्षण क्षेत्रों की सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन से संघर्ष करने के लिए नवीनतम तकनीकों का उपयोग शामिल होगा।
  3. प्रबंधन की बढ़ाई: योजना के अंतर्गत, समुद्री संपदा के प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न प्रबंधन कार्यक्रम और प्रणालियों की विकास की जाएगी। इसमें समुद्री संपदा के जलवायु परिवर्तन के प्रभाव का मूल्यांकन, प्रबंधन प्रक्रियाओं का सुधार, संगठनात्मक क्षमता का विकास और नवीनतम तकनीकों का उपयोग शामिल होगा।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लाभ क्या क्या है ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से निम्नलिखित लाभ प्राप्त हो सकते हैं:

1.जलवायु परिवर्तन से लड़ाई: योजना के अंतर्गत, समुद्री जीवन को संबंधित प्रदेशों में प्रबंधित करने के लिए प्रौद्योगिकी विकास और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई के लिए उचित उपकरण प्रदान किए जाएंगे।

2.समुद्री जीवन का संरक्षण: योजना से समुद्री जीवन को संरक्षित करने के लिए उपयुक्त नीतियों का विकास किया जाएगा।

3.मत्स्य पालन के लिए ऋण सुविधा: योजना के अंतर्गत मत्स्य पालन से जुड़े लोगों को बेहतर ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

4.मत्स्य संबंधित क्षेत्र में विकास: योजना से मत्स्य संबंधित क्षेत्र में विकास होगा। यह रोजगार के अवसरों को बढ़ाएगा और जीविकोपार्जन का स्रोत बनेगा।

5.मत्स्यगंधा नाविकों को आर्थिक सहायता: योजना के तहत, मत्स्यगंधा नाविकों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है ताकि उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके और वे अपने काम को सुधार सकें।

6.बढ़ी हुई समुद्री संपदा की संरक्षा: योजना से समुद्री संपदा की संरक्षा में सुधार होगा। इससे समुद्री जीवन की संरक्षा और समुद्री पारिस्थितिकी के प्रभावों से बचाव होगा।

7.तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण: योजना के अंतर्गत, तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की जाती है ताकि मत्स्यगंधा नाविकों को नवीनतम तकनीकों का उपयोग करने और प्रबंधन क्षमता को विकसित करने में मदद मिल सके।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत क्या नई रणनीतियाँ हैं?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत प्रमुख नई रणनीतियों में शामिल हैं:

  1. वित्तीय सहायता: इस योजना के तहत मत्स्य उत्पादन क्षेत्र में वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी जिससे किसानों को अधिक धनराशि के साथ अपने काम को बढ़ाने का मौका मिलेगा।
  2. टेक्नोलॉजी का उपयोग: इस योजना के तहत टेक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा जिससे मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में नवीनतम और उन्नत तकनीक का उपयोग किया जा सकेगा।
  3. संचार नेटवर्क: इस योजना के तहत संचार नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा ताकि किसानों और समुद्री जलवायु उत्पादकों के बीच बेहतर संचार सुविधाएं हों।
  4. मत्स्य उत्पादन क्षेत्र का विस्तार: इस योजना के तहत मत्स्य उत्पादन क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा ताकि किसानों को अधिक उत्पादन करने के लिए जगह मिल सके।
  5. मत्स्यगंधा नाविकों के लिए ऋण योजना: मत्स्यगंधा नाविकों के लिए ऋण सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जिससे उन्हें विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक सहायता मिलती है और वे अपने उद्योग को विस्तारित और सुदृढ़ कर सकते हैं।
  6. मत्स्य पालन के लिए ऋण योजना: मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए ऋण सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इससे मत्स्य पालकों को आर्थिक सहायता मिलती है और वे अपने पालन व्यवसाय को मजबूत कर सकते हैं।
  7. मत्स्य उद्योग के विकास का लक्ष्य: योजना का मुख्य उद्देश्य मत्स्य उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है। इसके तहत विभिन्न उपाय अपनाए जाते हैं जैसे कि संभावित मत्स्य संपदा के अनुसार जल क्षेत्रों का विकास, तकनीकी उन्नति, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन, बाजार विकास आदि।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत कौन कौन लाभार्थी हैं?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत निम्नलिखित लाभार्थी हैं:

  1. मछुआरे: जो मत्स्य उत्पादन क्षेत्र में शामिल हैं और मछली पकड़ने, पालने और विपणन के साथ जुड़े हुए हैं।
  2. मछली किसान: जो मछली उत्पादन के क्षेत्र में काम करते हैं और मछली पालन, मछली बीज उत्पादन और मछली विकास के साथ जुड़े हुए हैं।
  3. मछली श्रमिक और मछली विक्रेता: जो मछली संबंधित क्षेत्र में श्रमिक और मछली उत्पादों की विक्रेता हैं।
  4. मत्स्य विकास निगम: समुद्री संपदा के प्रबंधन, मत्स्य उद्योग के विकास और मत्स्य परियोजनाओं को समर्थन करने वाले निगम।
  5. मत्स्य पालन क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह: स्वयं सहायता समूहों के रूप में संगठित लोग जो मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए संगठित हैं।
  6. केंद्र सरकार और इकाइयां: योजना के तहत केंद्र सरकार और उसके संबंधित इकाइयां जो मत्स्य संपदा के प्रबंधन और विकास में संलग्न हैं।
  7. मत्स्य सहकारिता: मत्स्य सहकारिता संगठन और कूपरेटिव समूह जो मत्स्य संपदा के विकास और संगठन को समर्थन करते हैं।
  8. मत्स्य पालन संघ: मत्स्य पालन संघ और संगठन जो मत्स्य पालन व्यवसाय को संचालित करते हैं और मत्स्य पालन के लिए समर्थन प्रदान करते हैं।
  9. उद्यमी और निजी फार्म: व्यक्ति और निजी क्षेत्र में स्थापित फार्म जो मत्स्य संपदा के उत्पादन और विपणन में लगे होते हैं।
  1. मछली किसान उत्पादक संगठन: विभिन्न मछली किसान संगठन और संघ जो मछली उत्पादकों के हितों की रक्षा और उनके विकास को समर्थन करते हैं।
  2. एसएससी, एसटी, महिला, अलग-अलग विकलांग व्यक्ति: अनुसूचित जाति/जनजाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाएं और विकलांग व्यक्तियां जो मत्स्य संपदा से जुड़े हुए हैं और इस योजना के लाभों का उठाना चाहते हैं।
  3. राज्य सरकारों, संघ शासित प्रदेशों और उनकी संस्थाएं: योजना राज्य सरकारों, केंद्र शासित प्रदेशों और संघ शासित क्षेत्रों के लिए उपलब्ध है और इन संस्थाओं को मत्स्य संपदा के प्रबंधन और विकास के लिए सहायता प्रदान करती है।
  1. राज्य पशुपालन विकास बोर्ड: राज्य पशुपालन विकास बोर्ड या समिति जो मत्स्य संपदा के प्रबंधन और विकास के लिए जिम्मेदार होते हैं और इस योजना के तहत विभिन्न कार्यों को संचालित करते हैं।
  2. इन लाभार्थियों को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वित्तीय समर्थन, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण, संगठनात्मक विकास, बाजार पहुंच, औद्योगिक स्थापना आदि की सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का किस प्रकार का प्रभाव पड़ा हैं?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का प्रभाव निम्नलिखित क्षेत्रों पर पड़ता है:

  1. मत्स्य उत्पादन: योजना के माध्यम से मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा मिलता है। इसके लिए सामर्थ्यवर्धन, मॉडर्न तकनीक का उपयोग, प्रशिक्षण, बीमा, प्रदायक संरचनाओं का विकास आदि कार्रवाईयाँ की जाती हैं।
  2. मत्स्य प्रबंधन: योजना द्वारा मत्स्य संपदा के प्रबंधन में सुधार होता है। संगठनात्मक क्षमता का विकास, मत्स्य पालन क्षेत्र में नई प्रविधियों और अद्यतनों का अनुसरण, सूचना प्रणाली के माध्यम से प्रबंधन और मॉनिटरिंग आदि कार्रवाईयाँ इस दिशा में होती हैं।
  3. रोजगार: मत्स्य संपदा योजना द्वारा मत्स्य उद्योग में रोजगार के अवसर सृजित होते हैं। नवीनतम तकनीक का उपयोग, उद्यमिता की प्रोत्साहना, बाजार पहुंच के सुधार, उत्पादों की मूल्यवर्धित बिक्री, मत्स्य प्रसंस्करण केंद्रों के स्थापना आदि से रोजगार के संभावनाएं में सुधार होता है।

इस योजना के माध्यम से, मछुआरों, मछली किसानों और मत्स्य श्रमिकों को नई तकनीकों का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया जाता है, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि होती है। इसके अलावा, उन्हें विभिन्न सब्सिडी, क्रेडिट, बीमा और अन्य सुविधाएं भी प्रदान की जाती हैं। यह योजना मत्स्य उत्पादन को बढ़ावा देने वाली नई तकनीकों का उपयोग करने और आर्थिक संचार को बेहतर बनाने के साथ-साथ समुद्री संभावनाओं को बढ़ावा देने में मदद करती है।

मछली पालन क्षेत्र से संबंधित अन्य उद्घाटन

मत्स्य पालन क्षेत्र से संबंधित अन्य उद्घाटन निम्नलिखित हैं:

  1. मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्र: विभिन्न राज्यों में मत्स्य पालन प्रशिक्षण केंद्रों के उद्घाटन किए गए हैं। ये प्रशिक्षण केंद्र मत्स्य पालन क्षेत्र में नवीनतम तकनीकियों, व्यवसायिक प्रबंधन, मत्स्य पोषण आदि के लिए प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।
  2. मत्स्य पालन मेला: देश भर में मत्स्य पालन मेले का आयोजन किया जाता है जिसमें मछुआरे, मछली किसानों और मत्स्य उद्यमियों को अद्यतन तकनीक, विपणन मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी आदि मिलती है। इसके द्वारा मत्स्य पालन क्षेत्र में उद्यमिता और नए संचार के संकल्प को बढ़ावा मिलता है।
  3. मत्स्य पालन संस्थाएं: बचाव और विकास के लिए विभिन्न मत्स्य पालन संस्थाएं स्थापित की जाती हैं। इन संस्थाओं के उद्घाटन से मत्स्य पालन समुदाय को संगठित होने, सहयोग और जागरूकता के लिए माध्यम मिलता है।
  4. फिश ब्रूड बैंक की स्थापना: फिश ब्रूड बैंक की स्थापना के माध्यम से मत्स्य उत्पादन में उच्च गुणवत्ता और जीवाश्म नियंत्रण की गारंटी दी जाती है। इससे मछली के जीवाश्मों का निर्यात और व्यापार बढ़ता है।
  5. जलीय रोग रेफरल प्रयोगशाला की स्थापना: किशनगंज में जलीय रोग रेफरल प्रयोगशाला की स्थापना की गई है। इस प्रयोगशाला के माध्यम से मत्स्य उत्पादन में रोगों के प्रबंधन के लिए शोध, जांच और सलाहकारी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं।
  6. वन यूनिट फिश फीड मिल का उद्घाटन: नीली क्रांति के तहत मेधा पूरा में वन यूनिट फिश फीड मिल का उद्घाटन किया गया है। इससे मत्स्य पालन क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले फिश फीड की आपूर्ति होती है जो मछली के विकास और उत्पादन में मदद करती है।
  7. रिफ्रेश ऑन व्हील का उद्घाटन : यह उद्घाटन पटना में नीली क्रांति के तहत किया गया है। रिफ्रेश ऑन व्हील एक पहिये वाला प्रवाह मशीन होती है जिसका उद्घाटन मत्स्य पालन क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। यह उद्घाटन द्वारा एक नया प्रौद्योगिकी तंत्र प्रदान किया गया है जो मछली पालन में सुगमता और अधिकतम उत्पादकता सुनिश्चित करने में मदद करेगा। रिफ्रेश ऑन व्हील की उपस्थिति से मछली पालकों को जल और आहार प्रबंधन के लिए नई संभावितताएं मिलेंगी और उनके प्रयासों को सफल बनाने में मदद मिलेगी।
  1. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा बिहार में व्यापक मछली उत्पादन प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, बिहार में व्यापक मछली उत्पादन प्रौद्योगिकी केंद्र का उद्घाटन किया गया है। इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य मछली उत्पादन क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों के अनुसरण करके मछली उत्पादन को बढ़ावा देना है। यह केंद्र विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों, गब्भरोपालन प्रशिक्षण, पोंड व्यवस्थापन, जलीय रोगों के प्रबंधन, प्रोटीन आहार प्रबंधन, तकनीकी सहायता, जलीय नगरिकता, आर्थिक विवरण आदि के लिए समर्पित है। इसके माध्यम से कृषि विश्वविद्यालय मत्स्य उत्पादन क्षेत्र के विद्यार्थियों, किसानों, औद्योगिक संगठनों, सरकारी अधिकारियों आदि को तकनीकी ज्ञान और योग्यता प्रदान करता है ताकि मत्स्य उत्पादन सेक्टर में वृद्धि हो सके।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का बजट क्या है ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत 21 राज्यों ने प्रस्ताव दिया था और सभी प्रस्ताव सरकार द्वारा स्वीकृत किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप, सरकार ने इस योजना के लिए 1681.32 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है। यह बजट विभिन्न क्षेत्रों में मत्स्य पालन के विकास और संरचना, प्रशिक्षण और उन्नति, तंत्रिका और व्यवसायिकता, अधिकृत प्रक्रियाओं का आवंटन, पशुधन की देखभाल, बीमा और ऋण समर्थन, तकनीकी सहायता, औद्योगिक अवसर, आदि के लिए उपयोग होगा। यह बजट मत्स्य पालन क्षेत्र के विकास और समृद्धि को संभव बनाने में मदद करेगा।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की पात्रता क्या है ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की पात्रता के लिए निम्नलिखित मानदंडों का पालन किया जाना चाहिए:

  1. मत्स्य उत्पादन करने वाले व्यक्ति: योजना में शामिल होने के लिए, आवेदकों को मत्स्य उत्पादन से संबंधित होना चाहिए, जैसे मछुआरे, मत्स्य विपणन व्यवसायी, मत्स्य पालक, आदि।
  2. स्थायी निवास: आवेदक को योजना के लाभार्थी राज्य में स्थायी निवासी होना चाहिए।
  3. आय की सीमा: आवेदक की आय की सीमा योजना द्वारा निर्धारित आय सीमा के अंतर्गत होनी चाहिए। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित आय सीमा के अनुसार आय को जांचा जाता है।
  4. पंजीकरण: आवेदकों को योजना के लिए आवेदन प्राप्त करने के लिए पंजीकृत करना चाहिए।
  5. दस्तावेज़: आवेदकों को आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रतिलिपि प्रस्तुत करनी होती है, जैसे पहचान प्रमाण पत्र, पता प्रमाण पत्र, बैंक स्टेटमेंट, आदि।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए जरूरी दस्तावेज क्या क्या हैं ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:

  1. आधार कार्ड
  2. बैंक खाता विवरण (जो आधार से लिंक हो)
  3. जाति प्रमाण पत्र
  4. छठ आंगन में पंजीकरण संख्या (यदि आपकी महिला है तो)
  5. आवेदन फॉर्म
  6. किसान खाता नंबर (किसानों के लिए)
  7. श्रमिक जाति के लिए, जनरेटेड लिस्ट और संबंधित दस्तावेजों की जरूरत होती है।

इनके अलावा, आवेदक को कुछ अन्य दस्तावेजों को भी जमा करने की आवश्यकता हो सकती है जो विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकते हैं। इसलिए, आवेदकों को अपने राज्य के मत्स्य विभाग से संपर्क करना चाहिए और उनसे इस योजना के लिए आवश्यक दस्तावेजों की सूची और अन्य जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए आवेदन कैसे करें ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया निम्नलिखित होती है:

  1. आवेदन पत्र: पहले, आपको प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के आवेदन पत्र को डाउनलोड करना होगा। यह आप आधिकारिक वेबसाइट या नजदीकी मत्स्य विभाग के कार्यालय से प्राप्त कर सकते हैं।
  2. आवश्यक दस्तावेज: आपको अपने आवेदन पत्र के साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे, जैसे कि आधार कार्ड, बैंक खाता विवरण, जाति प्रमाण पत्र, आंगनवाड़ी पंजीकरण संख्या (यदि लागू हो), किसान खाता नंबर (यदि लागू हो), आदि।
  3. आवेदन जमा: आपको अपने आवेदन पत्र और दस्तावेजों को संबंधित मत्स्य विभाग के कार्यालय में जमा करना होगा। आपको निर्धारित समय पर आवेदन करने की सलाह दी जाती है।
  4. प्रमाणीकरण और समीक्षा: आवेदन जमा होने के बाद, आपके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की प्रमाणित करने और योजना के पात्रता मानदंडों के आधार पर आपका आवेदन समीक्षित किया जायेगा।

ई-गोपाला ऐप

ई-गोपाला एप एक मोबाइल ऐप्लिकेशन है जो मत्स्य संबंधित कार्यों को सुगम बनाने के लिए भारतीय सरकार द्वारा शुरू की गई है। यह एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जिसका उपयोग मत्स्य पालक, मछुआरे, व्यापारियों और अन्य मत्स्य संबंधित स्थानीय दलों को उनके दैनिक कार्यों को संचालित करने और सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ उठाने के लिए किया जा सकता है।

ई-गोपाला एप के माध्यम से उपयोगकर्ता निम्नलिखित कार्य कर सकते हैं:

  1. पंजीकरण: उपयोगकर्ता अपनी जानकारी को एप्लिकेशन में पंजीकृत कर सकते हैं।
  2. व्यापार और खरीद: ई-गोपाला के माध्यम से उपयोगकर्ता मछली खरीद और बिक्री के लिए आर्डर प्लेस कर सकते हैं।
  3. जानकारी और सेवाएं: उपयोगकर्ता अद्यतन, सरकारी योजनाओं की जानकारी, अधिसूचनाएं, पशु चिकित्सा सेवाएं, बीमा योजनाएं आदि के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

ई-गोपाला ऐप के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए आवेदन कैसे करें ?

ई-गोपाला ऐप के माध्यम से प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए आवेदन करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें:

  1. ई-गोपाला ऐप को अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड करें और इंस्टॉल करें.
  2. ऐप को खोलें और ‘नया आवेदन’ या ‘आवेदन करें’ आइकन पर क्लिक करें।
  3. आपके सामने आवेदन फॉर्म खुलेगा, जिसमें आपसे जानकारी के विभिन्न भागों को भरने के लिए कहा जाएगा।
  4. आपको अपनी व्यक्तिगत जानकारी, जैसे नाम, पता, जन्मतिथि, बैंक विवरण, मोबाइल नंबर, आदि दर्ज करना होगा।
  5. अपने प्रकरण का प्रकार चुनें, जैसे सामान्य ऋण, स्वरोजगार ऋण, किसान क्रेडिट कार्ड, आदि।
  6. आवेदन में उपयोग किए जाने वाले दस्तावेज, जैसे पहचान पत्र, बैंक खाता विवरण, आय प्रमाण पत्र, आदि, को अपलोड करें।
  7. जब आपका आवेदन पूरा हो जाएगा, तो उसे सबमिट करें।
  8. जब आप आवेदन को सबमिट करते हैं, तो आपको एक ट्रैकिंग नंबर प्रदान किया जाएगा। इस ट्रैकिंग नंबर का उपयोग आपके आवेदन की स्थिति की जांच करने के लिए किया जा सकता है। आप ई-गोपाला ऐप के माध्यम से या संबंधित अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ट्रैकिंग नंबर का उपयोग कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति की जांच कर सकते हैं।
  9. ध्यान दें कि आवेदन स्थिति की जांच के लिए आपको आवेदन करने के समय दिए गए ट्रैकिंग नंबर की आवश्यकता होगी।

निष्कर्ष

संपूर्ण रूप से कहें तो, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना एक महत्वपूर्ण पहल है जो मत्स्य पालन क्षेत्र को सुदृढ़, समृद्ध और सामरिक रूप से विकसित करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस योजना के माध्यम से, मछुआरे, मछली किसान, मछली श्रमिकों, मत्स्य विकास निगम और अन्य संगठनों को वित्तीय सहायता, तकनीकी समर्थन और प्रशिक्षण की सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा, यह योजना मत्स्य संपदा के प्रबंधन, जलीय संवर्धन और संवार्यता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण पहल कायम करती है।

इस योजना के माध्यम से, मत्स्य संपदा क्षेत्र में विकास के लिए एक संघटित और समर्पित प्रयास किया जा रहा है। इसके द्वारा जलीय संसाधनों का सुरक्षित उपयोग किया जा रहा है, मत्स्य पालन के लिए नवीनतम तकनीक और उपकरण प्रदान किए जा रहे हैं और समुद्री संपदा के प्रबंधन में सुधार किए जा रहे हैं।

Frequently Ask Questions ( FAQ’S )

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का उद्देश्य क्या है ?


प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना का मुख्य उद्देश्य मछुआरों और मत्स्य पालकों की आय को दोगुनी कर सार्थक रोजगार सृजित करना है।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत कब हुई थी ?

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत 10 अक्टूबर 2017 को हुई थी।

Apna Samaaj

Our mission at Apna Samaaj is to connect underprivileged communities in India with the resources and opportunities they need to thrive. We aim to create a comprehensive platform that provides access to welfare schemes from government bodies and NGOs, as well as private organizations, helping to bridge the gap between those in need and those who can provide support. Through our efforts, we strive to empower individuals and communities, drive economic growth, and make a positive impact on society.