मिड डे मील योजना :कुपोषण से लड़ता और शिक्षा को बढ़ाबा देता भारत

यह योजना मलनुत्रिति को कम करने और शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए एक संयुक्त पहल है। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले बच्चों के लिए यह एक महत्वपूर्ण स्रोत है जो उन्हें स्वस्थ और शिक्षित बनाता है। इसके माध्यम से बच्चों को पौष्टिक भोजन मिलता है, जो उनकी शारीरिक एवं मानसिक विकास में मदद करता है और उनकी शैक्षिक उपस्थिति, शिक्षा की गुणवत्ता और शैक्षिक संवेदनशीलता को बढ़ावा देता हैI

परिचय 

मध्य दिन के भोजन योजना (Mid Day Meal Scheme) एक सरकारी योजना है जो भारतीय शिक्षा विभाग द्वारा चलाई जाती है और उसका उद्देश्य देश भर के छात्र-छात्राओं के माध्यम से मलनुत्रिति का विरोध करना और शिक्षा को बढ़ावा देना है। इस योजना के अंतर्गत गरीबी रेखा के नीचे आने वाले बच्चों को स्कूल में मुफ्त और पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है ताकि उनकी पौष्टिक आहार संबंधी आपूर्ति सुनिश्चित हो और वे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें।

मिड डे मील योजना क्या है ?

मध्य दिन के भोजन योजना (Mid Day Meal Scheme) एक सरकारी योजना है जो भारत सरकार द्वारा चलाई जाती है। इस योजना के अंतर्गत पात्र बच्चों को स्कूल में मध्य दिन के भोजन की प्राप्ति होती है, जो गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करता है और उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करता है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य मलनुत्रिति को कम करने, बच्चों की शिक्षा में हिस्सा बढ़ाने, उनकी उपस्थिति बढ़ाने, छुट्टियों को कम करने और सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने में मदद करना है।

मिड डे मील योजना कब स्टार्ट हुई ?

मध्य दिन के भोजन योजना 15 अगस्त, 1995 को भारतीय संघ शिक्षा मंत्री आचार्या राममोहन राय द्वारा शुरू की गई थी। इस योजना के तहत स्कूली बच्चों को प्रतिदिन मुफ्त और पौष्टिक भोजन प्रदान करने की प्रक्रिया है। यह योजना प्राथमिक विद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में चलाई जाती है |

मिड डे मील योजना क्यूँ शुरू की गई ?

इसका प्रारम्भिक रूप से शुरू होने का कारण था कि गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले बच्चों को भोजन की आपूर्ति की कमी के कारण स्कूल जाने में परेशानी होती थी, जो उनकी शिक्षा को प्रभावित करती थी। मध्य दिन के भोजन योजना के माध्यम से सरकार ने इस समस्या का समाधान करने का प्रयास किया और गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन प्रदान करने की कोशिश की गई है। इसका उद्देश्य गरीबी के कारण शिक्षा से महंगाई और भोजन की कमी की समस्याओं को कम करके बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य को सुनिश्चित करना है।

मिड डे मील योजना के मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. मलनुत्रिति को कम करना: इस योजना के माध्यम से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले बच्चों को पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन प्रदान करके उनकी मलनुत्रिति को कम करने में मदद की जाती है।
  2. शिक्षा में हिस्सा बढ़ाना: मध्य दिन के भोजन योजना के द्वारा स्कूली बच्चों को नियमित भोजन प्रदान करके उनकी शिक्षा में हिस्सा बढ़ाने का उद्देश्य है। भोजन की प्राप्ति से बच्चों की उपस्थिति बढ़ती है और उनकी शैक्षिक गतिविधियों में सक्रियता बढ़ती है।
  3. छुट्टियों को कम करना: मध्य दिन के भोजन योजना के तहत बच्चों को प्रतिदिन भोजन प्रदान करके उनकी छुट्टियों को कम करने का प्रयास किया जाता है। यह बच्चों को स्कूल में नियमित रूप से आने को प्रोत्साहित करता है और उनके शैक्षिक गतिविधियों को बाधित नहीं करता।

मिड डे मील योजना के लाभ  क्या है?

  1. पौष्टिक भोजन प्रदान: मध्य दिन के भोजन योजना के माध्यम से गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले बच्चों को नियमित और पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है। इससे बच्चों को उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की आपूर्ति होती है और मलनुत्रिति से बचाव होता है।
  2. शिक्षा को प्रोत्साहित करना: मध्य दिन के भोजन योजना बच्चों की उपस्थिति को बढ़ाती है और स्कूली शिक्षा को प्रोत्साहित करती है। गरीबी रेखा के नीचे रहने वाले बच्चे जो गरीबी, परिवार के आपातकालीन स्थितियों और काम के प्रभाव से प्रभावित होते हैं, उनकी शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों को कम करती है।
  3. स्वास्थ्य सुरक्षा: मध्य दिन के भोजन योजना बच्चों की स्वास्थ्य सुरक्षा को सुनिश्चित करती है। नियमित और पौष्टिक भोजन से बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य को सुधारा जाता है |

मिड डे मील योजना के नुक्सान क्या है?

  1. आपातकालीन खर्च: मध्य दिन के भोजन योजना को संचालित करने के लिए स्कूलों को अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता होती है, जैसे कि रसोई गैस, उपकरण, स्टाफ, आदि। इसके परिणामस्वरूप, यह आपातकालीन खर्च बढ़ा सकता है और शैक्षिक संसाधनों की कमी को पूरा करने में परेशानी पैदा कर सकता है।
  2. खराब गुणवत्ता और संचालन: कुछ बार मध्य दिन के भोजन योजना के तहत प्रदान किए गए भोजन की गुणवत्ता और संचालन पर संदेह हो सकता है। रसोई गैस या उपकरण की खराबी, गैर-पाक भोजन, अनापचित खाना या खराब संचालन की वजह से बच्चों को पौष्टिक और स्वास्थ्यपूर्ण भोजन नहीं मिल सकता है।
  3. संचालन और लागत की व्यवस्था: मध्य दिन के भोजन योजना की संचालन और लागत की समय-से-समय पर व्यवस्था करना एक चुनौती हो सकती है।

मिड डे मील राशि

इस योजना के तहत प्रतिदिन एक छात्र पर 6.50 से लेकर 9.50 तक का खर्च आता है जिसका वहन  केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार मिल कर करती है।

मिड डे मील योजना के नियम

  1. पोषण मानक: मध्य दिन के भोजन योजना में प्रदान किए गए भोजन को पोषण मानकों के अनुरूप होना चाहिए, जो बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण को सुनिश्चित करता है। इसमें उच्च गुणवत्ता वाले पोषक तत्व, शाकाहारी और मांसाहारी विकल्प, फल और सब्जियां, दूध या दूध उत्पाद, अनाज आदि शामिल हो सकते हैं।
  2. इस योजना के तहत जारी खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता पर दिशानिर्देशों के अनुसार, परोसने से ठीक पहले एक शिक्षक द्वारा भोजन का स्वाद चखना अनिवार्य है। जिसका रिकॉर्ड रखा जाना है। इसके अलावा, एसएमसी सदस्य को भी शिक्षक के साथ रोटेशन के आधार पर भोजन का स्वाद लेना होगा।
  3. पात्रता: मध्य दिन के भोजन योजना के लिए पात्रता मानदंड निर्धारित किए गए होते हैं, जैसे कि गरीब बच्चे, निराधार बच्चे, दलित/आदिवासी बच्चे, राजकीय और निजी स्कूलों के बच्चे, आदि।

मिड डे मील योजना मंत्रालय

ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट मिनिस्ट्री द्वारा हमारे देश में मिड डे मील स्कीम को चलाया जा है। इस मंत्रालय द्वारा ही इस स्कीम से जुड़ी दिशा – निर्देश बनाइ गए है  साथ ही इस मंत्रालय द्वारा कई ऐसी कमेटी में बनाई गई हैं जो कि इस स्कीम को और बेहतर बनाने के कार्य करेंगी।

हर राज्य में बनाई गई कमेटी

मध्य दिन के भोजन योजना या मिड डे मील योजना भारत के विभिन्न राज्यों में बनाई गई है। इस योजना को शुरू करने का उद्देश्य गरीबी के स्तर को कम करने, शिक्षा को प्रोत्साहित करने, बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल करने, और मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में सुधार करने का है। यह योजना भारतीय संविधान की 86 वीं संशोधन विधेयक के तहत स्थापित की गई थी और उसके बाद से भारत के विभिन्न राज्यों में इसकी व्यापक क्रियान्वयन किया गया है।

Fighting malnutrition and promoting education in india

मिड डे मील अब पीएम पोषण

2021 के सितम्बर में मिड डे मील का नाम बदलकर पीएम पोषण अथवा पीएम पोषण शक्ति निर्माण कर दिया गया है । लेकिन इसके तहत अब प्री प्राइमरी या बाल वाटिका के बच्चों को भी जोड़ दिया गया है। इसके अलावा वे विद्यार्थी जो पहले से मध्याहन भोजन योजना के तहत कवर थे, वे तो कवर हैं ही।

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मिड डे मील योजना की कब शुरुआत हुई?

भारत सरकार ने 15 अगस्त 1995 को एक केंद्र प्रायोजित योजना शुरू की, जिसे प्राथमिक शिक्षा के लिए पोषण सहायता का राष्ट्रीय कार्यक्रम (NP-NSPE) कहा जाता है। बाद में इसका नाम बदलकर स्कूलों में मध्याह्न भोजन (Mid Day Meal) के राष्ट्रीय कार्यक्रम का नाम दिया गया|

मिड डे मील की राशि कितनी है ?

इस योजना के तहत प्रतिदिन एक छात्र पर 6.50 से लेकर 9.50 तक का खर्च आता है जिसका वहन  केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार मिल कर करती है।

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